सुपारी का पेड़
सुपारी का पेड़ रोपण के 2 से 5 साल बाद फल देना शुरू कर देता है। कुछ किस्में 5 साल में फल देने लगती हैं, जबकि कुछ कि किस्में थोड़ी जल्दी भी फल दे सकती हैं।पहला फल: रोपण के 2-5 साल बाद सुपारी का पेड़ फलना शुरू कर देता है।किस्मों का अंतर: कुछ स्थानीय किस्में 6 साल में फल देने लगती हैं, वहीं उन्नत किस्में जल्दी फल दे सकती हैं।फल पकने की अवधि: सुपारी के मेवे तब कटाई के लिए तैयार होते हैं जब वे तीन-चौथाई पक जाते हैं।फसल की संख्या: खेती के स्थान और मौसम के आधार पर, एक वर्ष में 3 से 5 बार तक कटाई की जा सकती है।
सुपारी (Areca Nut) की खेती भारत में सदियों से की जा रही है — यह एक लाभदायक नकदी फसल (cash crop) है, जो लम्बे समय तक स्थायी आय देती है।
सुपारी को कई नामों से जाना जाता है: अरेका नट, पान मसाला नट, बीटल नट, या पगुआ।
सुपारी (Areca catechu) की खेती की पूरी जानकारी
1. परिचय
- वैज्ञानिक नाम: Areca catechu
- परिवार: Arecaceae
- मुख्य उत्पाद: सुपारी (Areca nut)
- उपयोग: पान मसाला, औषधि, रंगाई, और धार्मिक कार्यों में
2. भारत में प्रमुख क्षेत्र
सुपारी की खेती मुख्यतः इन राज्यों में होती है:
- कर्नाटक (सर्वाधिक उत्पादन)
- केरल, असम, मेघालय, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र और गोवा
3. जलवायु और मिट्टी की आवश्यकता
| घटक | विवरण |
|---|---|
| जलवायु | गर्म और नम (उष्णकटिबंधीय) |
| तापमान | 20°C – 35°C |
| वर्षा | 1500 – 2500 मिमी |
| ऊँचाई | समुद्र तल से 200 – 1000 मीटर तक |
| मिट्टी | गहरी दोमट, लाल या बलुई मिट्टी, अच्छी जलनिकासी के साथ |
| pH | 5.5 – 7.0 |
ध्यान दें: सुपारी को सूखे और तेज़ हवाओं से नुकसान होता है, इसलिए सिंचाई और हवा रोधक पेड़ जरूरी हैं।
4. रोपण की विधि
- बीज चयन: पकी हुई, स्वस्थ सुपारी चुनकर बीज तैयार करें।
- नर्सरी: बीजों को रेत या मिट्टी में बोकर 8–12 माह तक नर्सरी में रखें।
- रोपण समय: जून से अगस्त (मानसून की शुरुआत में)
- दूरी:
- 2.7 x 2.7 मीटर (लगभग 550–600 पौधे प्रति एकड़)
- गड्ढे का आकार: 45 x 45 x 45 से.मी.
- खाद: प्रति गड्ढे में गोबर खाद 10–15 किलो डालें।
5. देखभाल और प्रबंधन
- सिंचाई:
- गर्मी में हर 7–10 दिन पर।
- बरसात में आवश्यकता अनुसार।
- खाद (Fertilizer):
- प्रति पौधा प्रति वर्ष 100 ग्राम नाइट्रोजन (N), 40 ग्राम फॉस्फोरस (P), 140 ग्राम पोटाश (K)।
- यह मात्रा 3 भागों में वर्ष भर में दें।
- निराई-गुड़ाई: 3–4 बार साल में करें।
- छाया प्रबंधन: युवा पौधों के लिए शुरुआती वर्षों में छाया आवश्यक है।
6. फूल और फल लगना
- सुपारी का पेड़ 5–7 वर्ष में फल देना शुरू करता है।
- पूरा उत्पादन 10वें वर्ष के बाद मिलता है।
- पेड़ की ऊँचाई 10–15 मीटर तक होती है और यह 50–60 वर्ष तक जीवित रहता है।
7. कटाई और प्रसंस्करण
- फल कटाई के 6–8 महीने बाद पकता है।
- फल की कटाई दिसंबर से मार्च के बीच की जाती है।
- दो प्रकार की सुपारी बनाई जाती है:
- काली सुपारी (Chali type) – पके फल को उबालकर सुखाया जाता है।
- लाल सुपारी (Kottapak) – हरे फल को उबालकर सुखाया जाता है।
8. उपज और मुनाफा
| विवरण | अनुमानित मात्रा |
|---|---|
| एक पेड़ से उपज | 1.5 – 2.5 किग्रा सूखी सुपारी |
| प्रति एकड़ पेड़ | 550 – 600 |
| कुल उपज | 800 – 1000 किग्रा प्रति एकड़ |
| बाजार मूल्य | ₹250 – ₹500 प्रति किलो (गुणवत्ता के अनुसार) |
| वार्षिक आय (10वें वर्ष के बाद) | ₹2.5 – ₹5 लाख प्रति एकड़ |
9. रोग और कीट नियंत्रण
| रोग / कीट | नियंत्रण |
|---|---|
| फुट रॉट / सड़न रोग | ट्राइकोडर्मा या बोर्डो मिक्स्चर का प्रयोग |
| सूखे पत्ते / माइट अटैक | नीम तेल स्प्रे |
| फल झुलसा रोग | कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव |
10. अंतरवर्तीय फसलें (Intercropping)
शुरुआती 5–6 वर्षों में सुपारी के नीचे छाया पसंद फसलें ली जा सकती हैं, जैसे:
- कोको (Cocoa)
- अदरक (Ginger)
- हल्दी (Turmeric)
- काली मिर्च (Pepper)
- वनीला (Vanilla)
इससे शुरुआती वर्षों में भी अच्छी आमदनी मिलती है।
11. सरकारी सहायता और संस्थान
- ICAR – Central Plantation Crops Research Institute (CPCRI), कासरगोड (केरल)
→ सुपारी, नारियल और कोको पर अनुसंधान व प्रशिक्षण। - CAMPCO (Central Arecanut and Cocoa Marketing & Processing Co-op)
→ किसानों से सुपारी और कोको की खरीद और प्रोसेसिंग करता है। - राज्य बागवानी विभाग
→ पौध, प्रशिक्षण और अनुदान (subsidy) प्रदान करते हैं।
संक्षेप में फायदे
- एक बार रोपण करने पर 50 वर्ष तक उत्पादन।
- स्थायी नकदी फसल।
- नारियल, कोको, काली मिर्च जैसी फसलों के साथ लगाई जा सकती है।
- प्रसंस्करण और विपणन के अनेक विकल्प उपलब्ध।


