डीएपी (\(18-46-0\))
डीएपी (\(18-46-0\)) एक फॉस्फोरस और नाइट्रोजन युक्त उर्वरक है जिसका उपयोग जड़ों के विकास, पौधों के प्रारंभिक विकास और फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग आमतौर पर बुवाई के समय मिट्टी में मिलाकर किया जाता है, लेकिन इसे शरद ऋतु की जुताई के बाद भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह पानी में घुलनशील है और अम्लीय मिट्टी में फॉस्फोरस को पौधों के लिए अधिक सुलभ बनाता है। डीएपी का विस्तृत उपयोग: बुवाई के समय: डीएपी को बुवाई के समय बीज के साथ मिट्टी में मिलाया जाता है, क्योंकि यह पौधों की जड़ों को मजबूत और स्वस्थ बनाता है।फसल की शुरुआत: डीएपी के 18% नाइट्रोजन और 46% फॉस्फोरस का संयोजन पौधे के प्रारंभिक विकास के लिए आवश्यक है।अम्लीय मिट्टी में: डीएपी मिट्टी में घुलकर उसके पीएच को अस्थायी रूप से क्षारीय बनाता है, जिससे अम्लीय मिट्टी में फॉस्फोरस का अवशोषण बेहतर होता है।विभिन्न फसलों के लिए: यह दलहन, तिलहन और अनाज जैसी विभिन्न प्रकार की फसलों के लिए उपयुक्त है।अनुप्रयोग: डीएपी को सीधे मिट्टी में मिलाकर या दानेदार रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।उदाहरण: धान की बुवाई से पहले 50-60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से डीएपी का उपयोग फायदेमंद होता है। महत्वपूर्ण बातें: सही समय पर उपयोग: फास्फोरस युक्त उर्वरकों को बुवाई के समय ही मिट्टी में मिलाना चाहिए, क्योंकि खड़ी फसल में पानी में घोलकर देने से फास्फोरस का लाभ नहीं मिल पाता है।अन्य उर्वरकों से तुलना: डीएपी का एनपीके (NPK) अनुपात \(18:46:0\) है। यूरिया (\(46\%\) नाइट्रोजन) या पोटेशियम क्लोराइड (MOP) (\(60\%\) पोटेशियम) से इसकी तुलना की जा सकती है।


