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वनीला की खेती

वनीला की खेती में, फूलों को फली बनने में लगभग 9 से 10 महीने लगते हैं। हालांकि, पौधे को परिपक्व होकर पहली बार फल देने लायक होने में 2 से 5 साल लग सकते हैं, जो कि एक महत्वपूर्ण समय अवधि है।फूलों का परिपक्व होना: एक बार जब फूल लग जाते हैं, तो उन्हें वनीला की फली बनने और पकने में लगभग 9 से 10 महीने लगते हैं।
पौधे का पहली बार फल देना: एक नए वनीला के पौधे को खिलने और फल देने लायक होने में 2 से 5 साल लग सकते हैं, क्योंकि पौधे को पहले पर्याप्त लंबाई तक बढ़ना होता है।
कुल समय: इसलिए, रोपण से लेकर पहली कटाई तक, इसमें कुल 2 से 7 साल लग सकते हैं, जबकि एक बार फूल आने के बाद फली पकने में लगभग 9-10 महीने लगते हैं।

वनीला (Vanilla) दुनिया का सबसे महँगा मसाला है — केसर के बाद दूसरा सबसे कीमती।
इसे “सुगंध की रानी” कहा जाता है क्योंकि इसका उपयोग आइसक्रीम, केक, परफ्यूम, दवा, और कास्मेटिक में किया जाता है।

वनीला (Vanilla planifolia) की खेती की पूरी जानकारी

1. परिचय

  • वैज्ञानिक नाम: Vanilla planifolia
  • परिवार: Orchidaceae (ऑर्किड परिवार)
  • मूल स्थान: मेक्सिको
  • प्रमुख उत्पाद: वनीला पॉड (फल) — इससे वनीला एसेंस / फ्लेवर निकाला जाता है।

2. जलवायु और मिट्टी की आवश्यकता

घटकविवरण
जलवायुगर्म और नम, हल्की छाया वाली जगह
तापमान20°C – 30°C
वर्षा1500 – 3000 मिमी
ऊँचाईसमुद्र तल से 700–1500 मीटर
मिट्टीहल्की दोमट या जैविक पदार्थों से भरपूर, अच्छी जलनिकासी वाली मिट्टी
pH6.0 – 7.0

महत्वपूर्ण: वनीला को सीधी धूप से बचाना चाहिए — इसे अक्सर नारियल, सुपारी या कोको के पेड़ों की छाया में लगाया जाता है।

3. प्रचार (Propagation)

वनीला की खेती कटिंग (Stem cutting) से की जाती है —

  • 60–120 सें.मी. लंबी, स्वस्थ बेलों की कटिंग लें।
  • रोपण से पहले 2–3 दिन छायादार स्थान पर सुखाएँ।
  • नमीदार मिट्टी में 30–40 सें.मी. गहराई तक लगाएँ।

4. रोपण की विधि

  • समय: जून से अगस्त (मानसून की शुरुआत में)
  • दूरी: 2.5 x 2.5 मीटर
  • सहारा (Support): वनीला एक बेल है, इसलिए इसे जीवित पेड़ों (ग्लिरिसिडिया, एरिथ्रिना) या कंक्रीट खंभों का सहारा दिया जाता है।
  • छाया: लगभग 50% छाया जरूरी होती है।

5. देखभाल और प्रबंधन

  • सिंचाई: हफ्ते में 1–2 बार हल्की सिंचाई करें।
  • खाद: प्रति पौधा हर 3 महीने में गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट दें।
  • छँटाई: पौधे को 1.5–2 मीटर तक बढ़ने दें, फिर शीर्ष भाग मोड़कर नीचे बाँध दें ताकि फूल जल्दी आएँ।
  • परागण (Pollination):
    • प्राकृतिक रूप से वनीला में परागण बहुत कम होता है।
    • इसलिए हाथ से परागण (manual pollination) करना जरूरी है।
    • यह काम सुबह के समय (8–11 बजे) किया जाता है।

6. फूल और फल लगना

  • पौधा 2–3 साल में फूल देना शुरू करता है।
  • परागण के बाद 8–9 महीने में फलियाँ (pods) तैयार होती हैं।
  • हर पौधे से लगभग 300–600 ग्राम हरी फलियाँ प्राप्त होती हैं।

7. कटाई और प्रसंस्करण

वनीला फलियाँ तब तोड़ी जाती हैं जब वे हल्की पीली होने लगती हैं।
फिर उनका क्योरिंग (Curing) किया जाता है, जो 4 चरणों में होता है:

  1. ब्लांचिंग: गर्म पानी में थोड़ी देर डुबोना।
  2. स्वेटिंग: कपड़े में लपेटकर धूप में सुखाना।
  3. ड्राईंग: छाया में 15–20 दिन सुखाना।
  4. कंडीशनिंग: 2–3 महीने तक बंद पेटियों में रखना।

इससे फलियाँ काली, सुगंधित और लचीली बनती हैं।

8. उपज और लाभ

विवरणअनुमान
फलियाँ (Green Pods)300–600 किग्रा प्रति एकड़
सूखी वनीला (Cured pods)50–80 किग्रा प्रति एकड़
बाजार मूल्य (सूखी फलियाँ)₹15,000 – ₹40,000 प्रति किग्रा
शुद्ध लाभ (5वें वर्ष से)₹8 – ₹12 लाख प्रति एकड़ (अच्छी देखभाल पर)

9. रोग और कीट नियंत्रण

  • रूट रॉट (Root rot): जलभराव से बचाएँ, ट्राइकोडर्मा जैव-फफूंदीनाशक डालें।
  • स्टेम ब्लाइट: प्रभावित भाग काटकर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करें।
  • स्नेल और कीड़े: जैविक कीटनाशक का प्रयोग करें।

10. मार्केट और खरीदार

  • प्रमुख खरीदार: फ्लेवर और फ्रेगरेंस उद्योग, चॉकलेट कंपनियाँ, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ
  • भारत में केरल, कोडाईकनाल, ऊटी, चिकमंगलूर, और कोडागु क्षेत्र वनीला के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • निर्यात बाजार: अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, जापान, UAE आदि।

11. सरकारी सहायता और प्रशिक्षण

  • Spices Board of India (कोच्चि) — पौध, तकनीकी सहायता और निर्यात मार्गदर्शन देता है।
  • ICAR – Indian Institute of Spices Research (Calicut) — प्रशिक्षण और रोग प्रबंधन पर अनुसंधान करता है।
  • कुछ राज्य योजनाओं में वनीला को हाई-वैल्यू क्रॉप के रूप में प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

संक्षेप में फायद

  • उच्च मूल्य वाली फसल
  • कम जगह में लग सकती है
  • छायादार फसल (नारियल, सुपारी, कोको के नीचे) के रूप में उत्तम
  • 10–12 साल तक उपज देती है

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