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कोको के पेड़

कोको के पेड़ को फल देने में लगभग 4-5 साल लगते हैं, हालांकि कुछ मामलों में यह 3 साल में भी शुरू हो सकता है। एक बार फल देना शुरू करने के बाद, यह 25-30 साल तक उत्पादन जारी रख सकता है।
पहली फसल: पेड़ लगाने के बाद पहली फसल लेने में लगभग 4-5 साल लग सकते हैं।
अधिकतम उत्पादन: पेड़ 5 से 10 साल की उम्र के बीच अपने चरम उत्पादन पर पहुँचते हैं।
फलों का परिपक्व होना: एक बार परागण होने के बाद, फली को पकने में लगभग 6 महीने लगते हैं, जिसके बाद इसे काटा जा सकता है।

कोको (Cocoa / Cacao) की खेती आज भारत में एक लाभदायक बागवानी फसल बन चुकी है — खासकर उन किसानों के लिए जो नारियल या सुपारी (Arecanut) के बागानों के साथ अंतरवर्तीय (intercropping) फसल लगाना चाहते हैं।

कोको (Cocoa) पेड़ की खेती की पूरी जानकारी

1. परिचय

  • वैज्ञानिक नाम: Theobroma cacao
  • परिवार: Malvaceae
  • मूल स्थान: दक्षिण अमेरिका
  • मुख्य उत्पाद: कोको बीन्स (जिससे चॉकलेट, कोको पाउडर, और कोको बटर बनते हैं)

2. भारत में प्रमुख क्षेत्र

भारत में कोको की खेती मुख्य रूप से इन राज्यों में होती है:

  • केरल
  • कर्नाटक
  • आंध्र प्रदेश
  • तमिलनाडु

अब कुछ किसानों ने ओडिशा, महाराष्ट्र, गोवा और पूर्वोत्तर राज्यों में भी इसे अपनाना शुरू किया है।


3. जलवायु और मिट्टी की आवश्यकता

घटकविवरण
जलवायुगर्म, नम और छायादार वातावरण
तापमान25°C – 35°C
वर्षा1500–2500 मिमी प्रति वर्ष
मिट्टीगहरी दोमट या लाल बलुई मिट्टी, अच्छी जलनिकासी के साथ
pH स्तर6.0 – 7.5 उपयुक्त

🟤 महत्वपूर्ण: कोको सीधे धूप में नहीं पनपता, इसलिए इसे अक्सर नारियल या सुपारी के पेड़ों के नीचे लगाया जाता है।


4. रोपण की विधि

  • रोपण समय: जून से अगस्त (मानसून की शुरुआत में)
  • दूरी:
    • अकेली फसल: 3 x 3 मीटर
    • नारियल/सुपारी के नीचे: 2.7 x 2.7 मीटर
  • पौधे तैयार करना:
    • बीज या ग्राफ्टिंग द्वारा।
    • नर्सरी में 3–4 महीने के पौधे तैयार करके खेत में लगाएँ।

5. देखभाल

  • सिंचाई: 10–15 दिन के अंतराल पर (खासकर गर्मी में)।
  • खाद:
    • प्रति पौधा प्रति वर्ष लगभग 100–150 ग्राम NPK (15:15:15) तीन बार में दें।
    • जैविक खाद (गोबर या वर्मी कम्पोस्ट) देना भी फायदेमंद है।
  • छँटाई (Pruning): 1 वर्ष बाद सूखी या नीचे की शाखाएँ काटें।
  • कीट नियंत्रण: शूट बोअर, मच्छर और ब्लैक पॉड रोग से बचाव के लिए नीम-आधारित दवा या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करें।

6. फूल और फल लगना

  • पौधा 3 साल में फूल देना शुरू करता है।
  • 5वें वर्ष से अच्छी पैदावार मिलती है।
  • फल पकने में 5–6 महीने लगते हैं।

7. कटाई और उपज

  • एक पेड़ से प्रति वर्ष औसतन 1–2 किग्रा सूखे कोको बीन्स मिलते हैं।
  • 1 एकड़ में लगभग 400–500 पेड़ लगाए जा सकते हैं।
  • औसत उपज: 400–600 किग्रा सूखे बीन्स प्रति एकड़/वर्ष

8. प्रसंस्करण (Processing)

कटाई के बाद कोको फलों से बीज निकालकर 5–7 दिन फर्मेंटेशन में रखे जाते हैं, फिर धूप में सुखाए जाते हैं।
इसके बाद ये बीन्स चॉकलेट उद्योग को बेचे जाते हैं।


9. लागत और मुनाफा (अनुमानित)

विवरणलागत / लाभ (प्रति एकड़ / वर्ष)
शुरुआती लागत (रोपण + सिंचाई + पौधे)₹50,000 – ₹80,000
वार्षिक रखरखाव₹15,000 – ₹25,000
उपज का मूल्य₹1.5 – ₹3 लाख (उद्योगिक दरों पर)
शुद्ध लाभ₹1 – ₹2 लाख / वर्ष (5वें वर्ष के बाद)

10. बाजार और खरीदार

  • प्रमुख खरीदार: कैडबरी, नेस्ले, CAMPCO, ITC, Mondelez India
  • स्थानीय मंडियाँ और कोको सहकारी समितियाँ भी बीन्स खरीदती हैं।
  • फर्मेंटेड बीन्स का मूल्य अधिक मिलता है।

11. सरकारी सहायता / प्रशिक्षण

  • Coconut Development Board (CDB) और CAMPCO (Central Arecanut and Cocoa Marketing and Processing Co-op) कोको किसानों को तकनीकी सहायता और पौधे उपलब्ध कराते हैं।
  • कुछ राज्य सरकारें सब्सिडी (40–50%) भी देती हैं अगर आप नारियल/सुपारी के साथ कोको लगाते हैं।

🌿 मुख्य सुझाव

  • कोको को हमेशा छाया वाली जगह में लगाएँ।
  • फर्मेंटेशन और सुखाने की गुणवत्ता पर ध्यान दें — इससे बीन्स की कीमत बढ़ती है।
  • स्थानीय सहकारी समिति से जुड़कर बाजार और तकनीकी जानकारी प्राप्त करें।

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