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अगरवुड के पेड़

अगरवुड के पेड़ की खेती में एक एकड़ में 400 से 500 पौधे लग सकते हैं। 5 फ़ीट चौड़ाई और 5 फ़ीट लंबाई की दूरी पर पौधे को रोपना चाहिए। अगरवुड प्लांट की कीमत 350 रुपए प्रति पौधा होती है। गड्डा एक फुट गहरा और एक फुट चौड़ा होना चाहिए।अगरवुड का पेड़ 7 से 9 साल में बाज़ार में बिकने के लिए तैयार हो जाता है। 15 से 17 सेंटीमीटर का डायमीटर होने पर पेड़ की कटाई करनी चाहिए। इसके साथ ही पेड़ की लंबाई 50 से 60 फ़ीट होनी चाहिए।

अगरवुड (Agarwood) जिसे उद, गोंध, ऊद, या काला लकड़ी (Black gold) भी कहा जाता है, एक अत्यंत मूल्यवान पेड़ है जिसकी लकड़ी और रेज़िन (सुगंधित गोंद) का उपयोग इत्र, धूप, और दवा में किया जाता है। इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों रुपये प्रति किलो तक होती है।

अगरवुड (Agarwood) पेड़ की खेती की पूरी जानकारी

1. वैज्ञानिक नाम और परिवार

  • वैज्ञानिक नाम: Aquilaria malaccensis
  • परिवार: Thymelaeaceae
  • मुख्य प्रजातियाँ: Aquilaria agallocha, Aquilaria crassna, Aquilaria malaccensis

2. अगरवुड कहाँ पाया जाता है

अगरवुड भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (असम, मेघालय, त्रिपुरा, नागालैंड, मिजोरम), साथ ही बांग्लादेश, मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है।

अब इसकी खेती दक्षिण भारत (केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक) और मध्य भारत में भी शुरू हो चुकी है।

3. जलवायु और मिट्टी की आवश्यकता

घटकविवरण
जलवायुगर्म और नम जलवायु (वार्षिक तापमान 25–35°C)
वर्षा1500–2500 मिमी वार्षिक
मिट्टीहल्की दोमट या लाल बलुई मिट्टी, pH 5.5–6.5
ऊँचाईसमुद्र तल से 100–1000 मीटर तक उपयुक्त

4. रोपण की विधि

  • पौध तैयार करने के लिए बीज या कटिंग का उपयोग किया जाता है।
  • 6×6 मीटर की दूरी पर पौधे लगाएँ (1 एकड़ में लगभग 250 पेड़)।
  • बरसात के मौसम (जून–जुलाई) में रोपण सबसे अच्छा रहता है।
  • शुरुआती 2–3 साल तक पौधों की सिंचाई और निराई-गुड़ाई जरूरी होती है।

5. संक्रमण (इन्फेक्शन) प्रक्रिया — अगरवुड रेज़िन बनने का रहस्य

अगरवुड की असली कीमत उसकी लकड़ी में बनने वाले रेज़िन से आती है, जो पेड़ के घायल होने या फफूंदी संक्रमण से बनता है।

अब किसान कृत्रिम संक्रमण तकनीक का उपयोग करते हैं, जैसे:

  • Drilling method: पेड़ में छेद कर विशेष फंगस का इंजेक्शन देना।
  • Biological inoculation: जैविक माइक्रोब्स से संक्रमण।
  • 2–3 साल बाद पेड़ की लकड़ी में सुगंधित रेज़िन बन जाता है।

6. कटाई (Harvesting)

  • पेड़ 7–10 साल की उम्र में काटने योग्य होता है।
  • संक्रमित भाग को सुखाकर अगरवुड (लकड़ी) और अगर ऑयल (तेल) निकाला जाता है।

7. आर्थिक लाभ

उत्पादबाजार मूल्य (अनुमानित)
अगरवुड लकड़ी₹15 लाख – ₹50 लाख प्रति टन
अगरवुड तेल₹5 लाख – ₹20 लाख प्रति लीटर
पाउडर / धूप₹20,000 – ₹1,00,000 प्रति किलो

👉 एक एकड़ से 10 साल में लगभग ₹25–50 लाख की आय संभव है, यदि संक्रमण सफल हो।


8. सरकारी नियम

अगरवुड पेड़ को CITES (Convention on International Trade in Endangered Species) में सूचीबद्ध किया गया है, इसलिए:

  • खेती करने के लिए राज्य वन विभाग से अनुमति लेनी होती है।
  • काटाई और निर्यात के लिए भी लाइसेंस आवश्यक होता है।

9. मुख्य सावधानियाँ

  • असली Aquilaria प्रजाति का पौधा ही लगाएँ।
  • पेड़ की उचित देखभाल और सुरक्षा करें।
  • संक्रमण विशेषज्ञ की सहायता से करें ताकि रेज़िन का उत्पादन बढ़े।

10. सहायता और प्रशिक्षण

भारत में कई संस्थाएँ अगरवुड की खेती पर प्रशिक्षण देती हैं, जैसे:

  • ICAR – Rain Forest Research Institute, जोरहाट (असम)
  • FRI (Forest Research Institute), देहरादून
  • राज्य वन विभागों के उद्यान विभाग

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